कहानियां · मैदान से

जो डायरी में लिखा, जो बैठक में सुना, जो वापसी के रास्ते में सोचा

यहां तीन लंबी कहानियां हैं, बिना पॉलिश के। एक पढ़ाई के बारे में, एक महिला की हथेली पर आई पहली कमाई के बारे में, और एक इस जमीन के बारे में जिस पर बाकी सब खड़ा है।

स्कूल छूटने के बाद, वापस आने तक

कक्षा नौ में पढ़ाई रुक गई थी। वजह किताब नहीं, डर था। यह कहानी उसी डर को खोलती है, और यह बताती है कि एक गांव, एक परिवार और एक कार्यकर्ता मिलकर कैसे उसे धीरे-धीरे हटाते हैं।

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समूह की बचत और रसोई की थाली

जिस परिवार में महिला की पहली कमाई ने दस्तक दी, वहां थाली में क्या बदला, और बैठक में उसकी कुर्सी की जगह कितनी बदली। एक स्वयं सहायता समूह की भीतर से देखी गई कहानी।

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BUNDELKHAND

पत्थर, पानी, आल्हा और हम

यह कहानी किसी एक व्यक्ति की नहीं है। यह जमीन की है, बेतवा की है, आल्हा की है, और उस जुड़ाव की है जो पलायन के बावजूद टूटता नहीं।

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सुझाव हैं

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