भूमि से जुड़ी समझ
कागज पर योजना बनाने से पहले गांव में दो घंटे बैठते हैं। परिवार की बात सुनते हैं। समस्या को ठीक से समझते हैं। इसके बाद ही काम टिकता है।
परिचय · स्थापित 1994
संस्था का आरंभ हमीरपुर जिले के गहरौली गांव में श्री रामगोपाल द्विवेदी और श्रीमती यशोदा द्विवेदी ने किया था। श्री रमेश चन्द्र द्विवेदी का जन्म भी गहरौली में हुआ। यही काम उन्हें विरासत में मिला। 6 फरवरी 1995 को अमर गंज चरखारी से ‘बुन्देलखण्ड विकास सेवा आश्रम’ का सोसायटी के रूप में पंजीकरण हुआ। बाद में संस्था और परिवार उरई में बस गए, और नवीनीकरण उरई, जिला जालौन से हुआ। तब से बुन्देलखण्ड के सात जिलों में शिक्षा, स्वास्थ्य, महिलाओं की आजीविका, संस्कृति और योग पर काम जारी है।
हमारी सोच
हम ऐसे बदलाव पर विश्वास करते हैं जो गांव के भीतर से आरंभ हो, परिवार के हाथ में रहे, और हमारे चले जाने के बाद भी बना रहे।
कागज पर योजना बनाने से पहले गांव में दो घंटे बैठते हैं। परिवार की बात सुनते हैं। समस्या को ठीक से समझते हैं। इसके बाद ही काम टिकता है।
बुन्देलखण्ड यूपी और एमपी के 22 जिलों तक फैला है। संस्था का सबसे गहरा काम यूपी के सात जिलों में है, और संबंध पूरे बुन्देलखण्ड से है। एक ही विधि हर गांव में काम नहीं करती।
हमारे लिए विकास केवल योजना और लाभ नहीं है। एक परिवार के साथ सालों तक खड़े रहना, यही असली बदलाव लाता है।
समयरेखा
श्री रामगोपाल द्विवेदी और श्रीमती यशोदा द्विवेदी ने हमीरपुर जिले के गहरौली गांव से सामाजिक काम का आरंभ किया। गहरौली पुराने समय से क्षेत्र के सबसे बड़े गांवों में गिना जाता है (2011 की जनगणना में जनसंख्या लगभग 11,000)। यहीं श्री रमेश चन्द्र द्विवेदी का जन्म भी हुआ।
श्री रामगोपाल द्विवेदी परिवार सहित गहरौली से चरखारी (महोबा) आ गए। उन्होंने चरखारी के ब्लॉक/तहसील कार्यालय में वरिष्ठ लेखाकार के पद पर सेवा दी। यही परिवार का दूसरा पड़ाव बना।
श्री रमेश चन्द्र द्विवेदी ने माता-पिता से मिली विरासत को सोसायटी का रूप दिया। ‘बुन्देलखण्ड विकास सेवा आश्रम’ का पंजीकरण अमर गंज चरखारी (तब हमीरपुर, अब महोबा) से हुआ। पंजीकरण संख्या J-7896। पहला ध्यान बच्चों को स्कूल से जोड़े रखने और परिवारों से सीधी बातचीत पर रहा।
श्री रमेश चन्द्र द्विवेदी की श्रम विभाग की सेवा उरई में थी। परिवार और संस्था का काम धीरे-धीरे उरई में आकर बस गए। संस्था का नवीनीकरण उरई, जिला जालौन से कराया गया।
स्कूल छूट चुके बच्चों को वापस पढ़ाई से जोड़ने का काम बुन्देलखण्ड के कई गांवों तक पहुंचा।
महिला स्वयं सहायता समूह, बचत और छोटे-छोटे रोजगार के काम जालौन, हमीरपुर और बांदा तक फैले।
श्री रमेश चन्द्र द्विवेदी ने उरई में ‘योग क्रांति’ का आरंभ किया। पार्कों, चौपालों और स्कूलों में सुबह के योग-प्राणायाम की परंपरा बनी, जो आज भी चल रही है।
स्वास्थ्य की जागरूकता, पोषण और किशोरियों से खुलकर बातचीत का काम सुदृढ़ हुआ। ललितपुर और चित्रकूट में नए गांव जुड़े।
श्री रमेश चन्द्र द्विवेदी 40 साल की सेवा के बाद वरिष्ठ श्रम प्रवर्तन अधिकारी (Senior Labour Enforcement Officer) पद से सेवानिवृत्त हुए। इसी साल से वे संस्था का सारा काम पूरे समय देखते हैं।
महामारी के साल। फोन पर बातचीत, घर तक राशन की सहायता और स्वास्थ्य की मूलभूत सूचना पर जोर रहा।
उरई में महर्षि वाग्भट्ट योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान का विधिवत शुभारंभ हुआ। श्री रमेश चन्द्र द्विवेदी संचालक हैं। सात दिन के आवासीय कार्यक्रम चलते हैं। बाहर से आने वालों के लिए भोजन और ठहरने की व्यवस्था है।
सातों जिलों में शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, संस्कृति और योग-प्राकृतिक चिकित्सा का काम एक साथ चल रहा है।
संस्था का ढांचा
संस्था का आरंभ श्री रमेश चन्द्र द्विवेदी और श्रीमती कान्ति द्विवेदी ने किया। आज भी उनकी सोच और अनुशासन से काम की दिशा तय होती है। अभी संस्था की अध्यक्ष श्रीमती कान्ति द्विवेदी हैं।
संस्था की असली शक्ति जिलों में रहने वाले कार्यकर्ता, स्थानीय स्वयंसेवक और गांव के अपने मददगार हैं। हर कार्यक्रम इन्हीं के परिश्रम पर खड़ा है।
संस्था का पंजीकरण 6 फरवरी 1995 को अमर गंज चरखारी, जिला हमीरपुर (वर्तमान जिला महोबा) से सोसायटी के रूप में हुआ था। पंजीकरण संख्या J-7896। बाद में नवीनीकरण उरई, जिला जालौन से कराया गया है। नीति आयोग के NGO Darpan पर हमारी यूनिक आईडी UP/2013/0059968 है। संस्था भारत सरकार और राज्य के नियमों के मुताबिक काम करती है।
80G और FCRA प्रमाणपत्र की सूचना मांगने पर दे देते हैं।
संस्था के खातों की हर साल लेखा-जांच होती है। खर्च का ब्यौरा सहयोगी संस्थाओं और दानदाताओं को बता देते हैं।