छूटे बच्चे, वापस कक्षा में
परिवार से बैठक, स्कूल से बातचीत, और तीसरे महीने तक बच्चे को फिर कक्षा में टिकाने का काम। कागज भरवाना सरल है, असली काम उसके बाद आरंभ होता है।
हमारा काम · पाँच खंभे
संस्था का काम पाँच क्षेत्रों में है, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिलाओं की आजीविका, युवा संस्कृति, और महर्षि वाग्भट्ट योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा। पाँचों एक-दूसरे से जुड़े हैं।
खंभा 01 · शिक्षा
बुन्देलखण्ड के कई गांवों में पढ़ाई छूटने का कारण एक नहीं होता। कहीं घर पर खेत का काम, कहीं शादी का दबाव, कहीं कक्षा में डर। हम इन तीनों रुकावटों पर अलग-अलग विधि से काम करते हैं।
परिवार से बैठक, स्कूल से बातचीत, और तीसरे महीने तक बच्चे को फिर कक्षा में टिकाने का काम। कागज भरवाना सरल है, असली काम उसके बाद आरंभ होता है।
जहां आवश्यकता हो, मूलभूत पढ़ाई की सामग्री, और जहां घर में कोना नहीं, वहां बस्ती का अपना पढ़ाई कोना। दिखावा नहीं, छोटी पर पक्की सहायता।
दसवीं-बारहवीं के बाद क्या। सरकारी पढ़ाई, कौशल, या छोटा रोजगार। हम परामर्श देते हैं, कागज समझाते हैं, और जहां आवश्यकता हो, वहां जोड़े रखते हैं।
खंभा 02 · स्वास्थ्य
एक दिन का शिविर, बैनर, तस्वीर, रिपोर्ट। यह विधि बहुत देखी है। हमारा प्रयास रहता है कि जांच के बाद परिवार को अगला पग भी मिले। जिस मां को हीमोग्लोबिन कम मिला, उसका अगला पग तय हो।
गांव में मूलभूत जांच, और हर मामले के लिए लिखकर अगला पग तय। जिस नाम पर रिपोर्ट में लाल चिह्न है, उसका हाल अगले हफ्ते भी पूछा जाता है।
मासिक धर्म, पोषण, गर्भावस्था, और मानसिक दबाव। ये बातें गांव में खुलकर नहीं होतीं, इसलिए महिला कार्यकर्ताओं के साथ छोटी बैठकें बनाई जाती हैं।
जब किसी मरीज को बड़े अस्पताल तक पहुंचाना होता है, तो रिकॉर्ड, परामर्श, और गाड़ी-घोड़े, तीनों पर ध्यान देते हैं। केवल मार्ग बता देना काफी नहीं।
खंभा 03 · महिला आजीविका
हमने बार-बार यह देखा है। जिस घर में महिला की कमाई तय हुई, वहां बच्चे की पढ़ाई जल्दी नहीं छूटती, थाली में एक सब्जी अधिक आती है, और गांव की बैठक में उसकी आवाज धीरे-धीरे पहुंचने लगती है।
दस, पंद्रह, बीस महिलाओं का समूह, हर महीने छोटी बचत, समूह का साझा खाता, और आवश्यकता पर कम ब्याज पर कर्ज। समूह चलता रहे, यह सबसे बड़ी चुनौती है, इसी पर हम सबसे अधिक ध्यान देते हैं।
सिलाई, अचार, पापड़, मसाला, डेयरी, दोने-पत्तल। बड़े व्यवसाय नहीं, परंतु महीने के तीन से पांच हजार की तयशुदा आमदनी। इसी से परिवार की स्थिति बदलती है।
आधार, जनधन, राशन, योजनाएं। इनमें महिला का नाम सही जगह जुड़ जाए तो आधी लड़ाई वहीं जीत ली जाती है। हम साथ बैठकर कागज भरवाते हैं, फिर उसका उपयोग भी सिखाते हैं।
कमाई से आगे का पग, बच्चे की पढ़ाई, स्वास्थ्य का खर्च, और गांव की बैठक में भागीदारी। समूह महिला की आवाज को अधिक लोगों तक ले जाता है।
खंभा 04 · युवा और संस्कृति
बुन्देलखण्ड की पहचान केवल पलायन की रिपोर्टों में नहीं है। आल्हा, दिवारी, कजरी, राई, सैरा और बुन्देली भाषा से ही लोगों का मिट्टी से जुड़ाव बनता है। हम इन्हें युवा कार्यक्रम का हिस्सा मानकर चलते हैं, अलग आयोजन नहीं।
हर महीने बैठक। पढ़ाई, रोजगार, नशा, संबंध, उत्तरदायित्व। बिना उपदेश, बिना मंच। केवल खुलकर बात।
आल्हा गाने वाले वयोवृद्ध, कजरी गाती लड़कियां, राई की थाप पर चलने वाले पांव। हम सुनते हैं, सहयोग करते हैं, और युवाओं को इसमें शामिल करते हैं।
जब युवा को नोटिस लिखने का काम, अभिभावक बैठक संभालने का अवसर, या आंगनबाड़ी का निरीक्षण का उत्तरदायित्व मिलता है, तो वह गांव से जल्दी नहीं निकलता।
खंभा 05 · महर्षि वाग्भट्ट योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, उरई
यह पहल संस्था के सह-संस्थापक श्री रमेश चन्द्र द्विवेदी की देख-रेख में उरई से चलती है। 2005 में उन्होंने उरई से ‘योग क्रांति’ की अगुवाई आरंभ की, और आगे के सालों में वे जालौन-झांसी क्षेत्र में पतंजलि योगपीठ से मण्डल प्रभारी के रूप में लंबे समय तक जुड़े रहे। निजी समूहों और छोटे-छोटे सत्रों में वे प्रतिदिन स्वयं योग और प्राणायाम करते हैं, दूसरों को भी कराते हैं। समय-समय पर स्थानीय समाचार पत्र उनके इस काम पर समाचार और लेख छापते रहते हैं। बीस साल के इसी परिश्रम पर यह कार्यक्रम टिका है।
भारत की अपनी चिकित्सा परंपरा कहती है, ऋतु के साथ बदलो, दिनचर्या ठीक रखो, शरीर को गहरी सांस दो, फिर रोग अक्सर नहीं आती। महर्षि वाग्भट्ट ने अष्टांगहृदय और अष्टांगसंग्रह में यही लिखा था। हम उसी सोच को गांव की भाषा और गांव के संसाधनों के साथ काम में लाते हैं।
हिताहितं सुखं दुःखमायुस्तस्य हिताहितम्।
मानं च तच्च यत्रोक्तमायुर्वेदः स उच्यते।। अष्टांगहृदय, सूत्रस्थान · महर्षि वाग्भट्ट
गांव की चौपाल या स्कूल के प्रांगण में सुबह का योग। आसन सरल, सांस पर ध्यान, और ऐसी दिनचर्या जो घर पर लौटकर भी चल सके। वयोवृद्ध, महिलाएं, बच्चे, सभी एक जगह।
मिट्टी की पट्टी, जल-चिकित्सा की मूलभूत सूचना, सूर्य-स्नान, उपवास का विज्ञान, और स्थानीय जड़ी-बूटियों की समझ। यह चमत्कार नहीं, लंबे अभ्यास की बात है।
बुन्देलखण्ड में जो उगता है वही थाली में। ज्वार, बाजरा, चना, तिल, गुड़, मौसमी सब्जी। हम बताते हैं कि कब क्या खाना है और क्यों। आवश्यक नहीं कि औषधि हर उत्तर हो।
मोबाइल का समय, निद्रा का समय, बच्चों की थाली, महिलाओं का पीड़ा, वयोवृद्धों का अकेलापन। परंपरा इन सब पर खामोश नहीं है। वाग्भट्ट के छोटे-छोटे सूत्रों की सीख को हम आज की भाषा में रखकर गांव से बात करते हैं।
जिलेवार काम
काम का रूप एक जैसा नहीं है। कहीं शिक्षा पर अधिक, कहीं स्वास्थ्य, कहीं समूह, कहीं युवा। बुन्देलखण्ड के सात जिलों में यही लचीलापन संस्था की पहचान है।
जालौन / Jalaun
जालौन हमारी जड़ है। यहां स्कूल छूटे बच्चे, महिला समूह और परिवार के स्वास्थ्य तक पहुंच पर सबसे लंबा काम है।
प्रमुख: पढ़ाई में सहयोग, स्वयं सहायता समूह, स्वास्थ्य तक पहुंच, समुदाय बैठक
झांसी / Jhansi
शहरी किनारा और ग्रामीण आबादी के बीच की खींचतान में किशोर-किशोरियों के संवाद, शिक्षा और स्वास्थ्य पर काम केंद्रित है।
प्रमुख: किशोर-किशोरी संवाद, सीखने के सत्र, युवा भागीदारी
ललितपुर / Lalitpur
जहां गांव दूर-दूर बसे हैं, वहां हम कार्यक्रमों की भीड़ नहीं लगाते। पोषण, बचत, और बच्चों की पढ़ाई में निरंतरता पर अधिक समय लगाते हैं।
प्रमुख: पोषण संवाद, महिला बचत, सीखने की निरंतरता
हमीरपुर / Hamirpur
सीधे परिवार से संवाद, स्वास्थ्य शिविरों से जोड़, और महिलाओं की आमदनी बढ़ाने वाले छोटे प्रयास यहां के काम का आधार हैं।
प्रमुख: स्वास्थ्य तक पहुंच, महिला कौशल, परिवार संपर्क
महोबा / Mahoba
महोबा की स्थानीय परिस्थितियों में बच्चों की पढ़ाई की निरंतरता, महिलाओं के समूह और साझा समाधान पर ध्यान जाता है।
प्रमुख: स्कूल सहयोग, समूह की दृढ़ता, गांव की बात सुनना
बांदा / Banda
बांदा में महिला समूह और युवा संवाद की बैठकें अक्सर जुड़ जाती हैं। परिवार को आवश्यक सेवाओं की सूचना एक ही मंच से पहुंचती है।
प्रमुख: युवा बैठक, महिला समूह, सेवा सूचना, सांस्कृतिक भागीदारी
चित्रकूट / Chitrakoot
चित्रकूट में काम सम्मानजनक संबंध पर टिका है। शिक्षा, स्वास्थ्य सूचना, महिला भागीदारी और स्थानीय सांस्कृतिक कार्यक्रम साथ चलते हैं।
प्रमुख: शिक्षा सहयोग, स्वास्थ्य सूचना, महिला भागीदारी, स्थानीय सांस्कृतिक कार्यक्रम
हमारे साथ काम
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