जिन लोगों ने संस्था की नींव में भरोसा, सेवा और अनुशासन रखा
यह पृष्ठ उन संस्थापकों को समर्पित है जिनकी वजह से बुन्देलखण्ड विकास सेवा आश्रम केवल एक संस्था नहीं, बल्कि गांवों से रिश्ते निभाने वाली पहल बन सका। उनका काम आज भी दिशा देता है।
RC
श्री रमेश चन्द्र द्विवेदी
संस्था की शुरुआती सोच को तय करने में उनकी बड़ी भूमिका रही। गांव की जरूरत को सीधे समझना, काम में अनुशासन रखना, और ऐसा ढांचा बनाना जो लंबे समय तक चले, उनके काम की पहचान थी।
जिन लोगों ने उनके साथ काम किया, वे उन्हें ऐसे व्यक्ति के रूप में याद करते हैं जो बात कम और काम ज्यादा करने पर भरोसा रखते थे। ग्रामीण जीवन की तकलीफों को वे दूर से नहीं, पास से देखते थे।
KD
श्रीमती कान्ति द्विवेदी
उन्होंने संस्था के काम में संवेदना, धैर्य और महिला भागीदारी को मजबूत आधार दिया। खास तौर पर महिलाओं और परिवारों के बीच संवाद बनाने में उनकी भूमिका प्रेरणा का स्रोत मानी जाती है।
उनकी पहचान सिर्फ सहयोगी भूमिका तक सीमित नहीं थी। वे इस बात की मिसाल थीं कि किसी भी सामाजिक पहल में महिलाओं की समझ, सहनशीलता और नेतृत्व कितना जरूरी होता है।
प्रेरणा चित्र
गांव के लोगों के साथ सीधा संवादमहिला भागीदारी और सामुदायिक नेतृत्व
हम उनकी विरासत को कैसे आगे बढ़ाते हैं
गांव में जाकर सुनना, फिर योजना बनाना
महिलाओं और परिवारों की भागीदारी को बीच में रखना
विकास को संस्कृति, सम्मान और रिश्तों से जोड़कर देखना
सम्मान और पहचान
समुदाय में भरोसे की पहचान
संस्थापकों की सबसे बड़ी पहचान औपचारिक पुरस्कारों से ज्यादा गांवों के बीच बना भरोसा रही। जिन परिवारों के साथ संस्था जुड़ी, वहां उनकी सादगी और लगातार मौजूदगी को सम्मान के रूप में याद किया जाता है।
संस्था के काम के तरीके पर स्थायी असर
अनुशासन, संवेदना, महिलाओं की भागीदारी, और बिना दिखावे के काम करना, ये चार बातें आज भी संस्था की पहचान हैं। यही उनकी सबसे बड़ी विरासत और असली उपलब्धि मानी जाती है।