+91 63948 44574 WhatsApp उरई · 1994 से
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14 अप्रैल 2025: उरई में महर्षि वाग्भट्ट योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान का शुभारंभ महर्षि वाग्भट्ट योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान, उरई: सात दिन का आवासीय कार्यक्रम, बाहर से आने वालों के लिए भोजन और ठहरने की व्यवस्था संस्था के तीस साल पूरे: 1994 से 2024 की यात्रा सदस्यता के आवेदन आरंभ, ‘साथ जुड़ें’ पन्ने पर जाएं

विशेष कार्यक्रम · उरई

महर्षि वाग्भट्ट योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान

7 दिन का आवासीय कार्यक्रम। मिट्टी चिकित्सा, जल चिकित्सा, योगासन, आयुर्वेदिक पंचकर्म और अधिक — रोग के अनुसार उपचार।

  • 7 दिन आवासीय
  • महिला / पुरुष अलग
  • भोजन व ठहरने की सुविधा
पूरी सूचना देखें

संस्था · अमरगंज चरखारी · स्थापित 1994

बुन्देलखण्ड विकास सेवा आश्रम, एक संस्था, तीस साल का काम

बुन्देलखण्ड विकास सेवा आश्रम 1994 से काम कर रही है, अमरगंज चरखारी में आरंभ, अब उरई में। बुन्देलखण्ड के गांवों के साथ पाँच क्षेत्रों में काम, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिलाओं की आजीविका, युवा संस्कृति, और महर्षि वाग्भट्ट योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा।

संस्था एक दृष्टि में

संस्था एक दृष्टि में

संस्था की कहानी

30

संस्था के काम के बरस

5

संस्था के मुख्य खंभे

7

उत्तर प्रदेश के जिले, जहां संस्था का सबसे अधिक काम है

1994

स्थापना वर्ष, अमरगंज चरखारी

संस्था कहां काम करती है

उत्तर प्रदेश के सात जिले

विस्तार से पढ़ें

संस्था की जमीनी पकड़ बुन्देलखण्ड के यूपी वाले सात जिलों में सबसे गहरी है। इन्हीं जिलों में 1994 से हमारे कार्यकर्ता, समूह और साझेदारियां बनी हैं। हर जिले के मिजाज के हिसाब से काम अलग ढंग से उतरता है।

संस्था के पाँच खंभे

पाँच क्षेत्रों में काम

पूरा ब्यौरा

संस्था पहले दिन से यही मानती आई है, गांव की कोई समस्या कभी अकेली नहीं होती। पढ़ाई कमजोर हो तो स्वास्थ्य भी पिछड़ती है, महिलाओं के समूह ठंडे पड़ जाएं तो बच्चों की आवाज भी दब जाती है। इसीलिए हम पाँचों खंभों को एक साथ रखते हैं, और रोग आने से पहले उसे रोकने वाले योग और प्राकृतिक चिकित्सा को भी उसी कतार में।

शिक्षा और सीखने का आश्रय

स्कूल छूट चुके बच्चों को ढूंढकर वापस पढ़ाई से जोड़ना, किताब-कॉपी की मूलभूत सहायता, और युवाओं को स्कूल के बाद की राह समझाना। असली पढ़ाई हमें वहीं दिखती है, जहां बच्चा क्लास में डरता नहीं है।

छूटे बच्चे पढ़ाई में आश्रय युवाओं की राह

स्वास्थ्य, पोषण और सही सूचना

गांव में जांच शिविर, महिला और किशोरी के स्वास्थ्य पर खुली बात, पोषण की समझ, और जब आवश्यकता पड़े तो परिवार को सही अस्पताल तक पहुंचाना। जांच करवाकर हाथ झाड़ लेना हमारी विधि नहीं है।

स्वास्थ्य शिविर पोषण सेवा तक पहुंच

महिलाओं की आमदनी और आवाज

स्वयं सहायता समूह, छोटी बचत, स्थानीय कौशल, और घर के पास से आरंभ हो सकने वाला काम। पैसा जब महिला के हाथ में आता है, बच्चे की थाली पहले बदलती है, फिर गांव की बैठक का माहौल।

स्वयं सहायता समूह बचत स्थानीय कौशल

युवा, संस्कृति और साझी भागीदारी

आल्हा, दिवारी, कजरी, राई और गांव की बैठकें केवल आयोजन नहीं हैं। इन्हीं से समाज एक साथ रहता है। युवाओं को हम इसी संस्कृति के भीतर उत्तरदायित्व सौंपते हैं, उससे अलग करके नहीं।

युवा संवाद लोक संस्कृति ग्राम बैठक

महर्षि वाग्भट्ट योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, उरई

संस्था के सह-संस्थापक श्री रमेश चन्द्र द्विवेदी ने 2005 में उरई से ‘योग क्रांति’ आरंभ की थी। आज यह पहल उसी बीस वर्षों के परिश्रम पर टिकी है। योग, प्राणायाम, प्राकृतिक चिकित्सा, आहार-विहार और ऋतुचर्या, सब एक साथ। महर्षि वाग्भट्ट के अष्टांगहृदय की बात को आज की भाषा में लाकर हम गांवों में योग शिविर, प्राकृतिक उपचार सत्र और जीवनशैली पर बैठकें करते हैं।

योग शिविर प्राकृतिक चिकित्सा आहार-विहार ऋतुचर्या
संस्थान और सात दिन का कार्यक्रम देखें

हम यहां क्यों

हम बुन्देलखण्ड में क्यों

संस्था उरई में इसलिए आरंभ हुई क्योंकि वहीं संस्थापकों ने गांव का हाल पास से देखा। बुन्देलखण्ड के पत्थर, पानी, सूखा, पलायन, आल्हा और बुन्देली बोली, इन सबको समझकर ही हमारा काम बनता है।

संस्था के मैदान से

तीन कहानियां

सभी कहानियां

ये कहानियां संस्था की डायरियों, बैठकों और महिला कार्यकर्ताओं के अनुभवों से निकली हैं। एक पढ़ाई की, एक समूह की बचत की, और एक उस मिट्टी की जिस पर हमारा सारा काम खड़ा है।

Stylised learning illustration

स्कूल छूटने के बाद, वापस आने तक

एक लंबी कहानी, जहां कक्षा की भित्ति ही सबसे बड़ा प्रश्न थी। बुन्देलखण्ड के एक परिवार और एक कार्यकर्ता के साथ बिताए कुछ दिन।

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Stylised livelihoods illustration

समूह की बचत और रसोई की थाली

जब महिला की हथेली में पहली बार पांच सौ आए, तो घर में क्या बदला, क्या अब भी नहीं बदला। खुली बातचीत के साथ एक लंबी कहानी।

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BUNDELKHAND

पत्थर, पानी, आल्हा और हम

बुन्देलखण्ड की पहचान केवल खेत तक नहीं है। यह लेख उस क्षेत्र की बात करता है जहां से संस्था का काम आरंभ हुआ।

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संस्था के साथ

साथ जुड़ें

आप स्वयंसेवा करना चाहें, संस्था से साझेदारी बनाना चाहें, या अध्ययन के लिए गांव आना चाहें, हम सुनने को तैयार हैं।

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