मिट्टी लेपन
शरीर पर मिट्टी की पट्टी और लेपन से ठंडक और शुद्धि।
संस्थान · उरई · बुन्देलखण्ड विकास सेवा आश्रम द्वारा संचालित
उरई का यह संस्थान बुन्देलखण्ड विकास सेवा आश्रम के सह-संस्थापक श्री रमेश चन्द्र द्विवेदी चलाते हैं। यहां योग, प्राकृतिक चिकित्सा, पंचकर्म और जीवनशैली पर परामर्श, सब सात दिन के आवासीय कार्यक्रम में मिलते हैं। पूरा काम अनुभवी चिकित्सकों की देख-रेख में चलता है।
परिचय
पुराने जमाने से पांच महाभूतों, पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश, को सबसे मूलभूत माना गया है। हमारा शरीर भी इन्हीं पांच तत्वों से बना है। प्राकृतिक चिकित्सा इन्हीं तत्वों की सहायता से शरीर को निरोग रखने की विधि है। यह औषधि वाली पद्धति नहीं है, यह जीने का एक ढंग है।
संस्थान में योग, पंचकर्म और प्राकृतिक उपचारों से शरीर की अपनी शक्ति को आश्रय देने पर जोर है। मकसद यही है कि शरीर को विश्राम मिले, खान-पान सही हो, और रोज का नियम बना रहे।
चिकित्सा सेवाएं
नीचे संस्थान की मुख्य सेवाओं की सूची है। आपके लिए कौन सी सेवा सही रहेगी, यह संस्थान आने पर परामर्श के बाद ही तय होता है।
शरीर पर मिट्टी की पट्टी और लेपन से ठंडक और शुद्धि।
गरम भाप से शरीर के रोम छिद्र खुलते हैं और गंदगी बाहर निकलती है।
रीढ़ पर पानी की हल्की धार पड़ती है। तनाव कम होता है, नसों को विश्राम मिलता है।
पूरे शरीर का स्नान, आवश्यकता के हिसाब से तापमान वाले पानी में।
कमर और पेट के निचले हिस्से के लिए छोटा जल स्नान।
जड़ी-बूटियों से भरी गरम पोटली से शरीर पर सेंक।
गर्दन पर औषधीय तेल का छोटा कुण्ड बनाकर रखा जाता है।
आंखों के चारों ओर हल्का घेरा बनाकर औषधीय घी रखा जाता है।
कांच या प्लास्टिक के कप लगाकर विशेष जगह का रक्त-संचार बढ़ाया जाता है।
घुटनों और कमर पर अलग-अलग औषधीय तेल का छोटा कुण्ड बनाकर रखा जाता है।
सुविधाएं
महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग उपचार कक्ष हैं।
मिट्टी की पट्टी और शरीर पर मिट्टी का लेपन।
ऊष्ण स्नान, स्टीम बाथ, हिप बाथ, स्पाइनल बाथ, आर्म एण्ड फुट बाथ, वेट सीट पैक, ऊनी और सूती लपेट।
जलनेति, सूत्रनेति, कुन्जल जैसी शुद्धि क्रियाएं, और साथ में नियमित आसन और प्राणायाम।
सूर्य की रंग किरणों से शरीर पर शांत प्रभाव डालने वाली पुरानी पद्धति।
आयुर्वेदिक मसाज और पाउडर मसाज की सुविधा।
स्वेदन, स्नेहन, जानु बस्ती, ग्रीवा बस्ती, पत्र पिण्ड स्वेदन, और शिरोधारा जैसी अलग-अलग क्रियाएं। अर्थराइटिस और गठिया जैसे वात रोगों में सहायक।
फिजियोथेरेपी के लिए एक्यूप्रेशर और चुम्बक चिकित्सा, रोग के हिसाब से चिकित्सकों की परामर्श पर।
यह कार्यक्रम किसके लिए
संस्थान का काम मुख्य रूप से जीवनशैली, विश्राम और सहायक उपचार पर टिका है। यह इमरजेंसी या तुरंत इलाज की जगह नहीं लेता। पुरानी बीमारियों में डॉक्टर की परामर्श के साथ-साथ इन सेवाओं का लाभ लिया जा सकता है।
वातरोग, जोड़ों की पीड़ा, गठिया, साइटिका, मांसपेशियों की पीड़ा, कमर और गर्दन की पीड़ा।
मधुमेह और रक्तचाप के साथ रोजमर्रा की जीवनशैली की देखभाल। मोटापा और दुबलेपन में लंबे समय की देखभाल।
दमा, बार-बार होने वाला नजला-जुकाम, गले के पुराने रोग।
कब्ज, एसिडिटी, गैस, बवासीर, और पाचन तंत्र के अन्य पुराने विकार।
लकवा के बाद की देखभाल, अनिद्रा, और मिर्गी जैसी स्थितियों में जीवनशैली का आश्रय।
चर्म रोग, सोराइसिस, और गुर्दों से जुड़े पुराने रोगों में सहायक देखभाल।
ध्यान दें: यह सूची सामान्य रूप से देखी जाने वाली स्थितियों की है। किस व्यक्ति के लिए कौन सी सेवा सही रहेगी, यह प्रवेश के समय आमने-सामने की बातचीत में ही तय होता है।
कार्यक्रम की रूपरेखा
रोग के हिसाब से सात दिन का क्रम बनाया जाता है। हर दिन सुबह योग और प्राणायाम, उसके बाद चिकित्सकों की परामर्श पर तय की गई प्राकृतिक चिकित्सा सेवाएं, और दिन में सात्विक आहार। शाम को विश्राम और जीवनशैली पर बातचीत।
बाहर के जिलों या राज्यों से आने वालों के लिए संस्थान में ही खाने और ठहरने का इंतजाम है। माहौल सरल, स्वच्छ और सात्विक रहता है।
संस्थान का औपचारिक शुभारंभ 14 अप्रैल 2025 को हुआ था। उसके पहले से बुन्देलखण्ड विकास सेवा आश्रम की 2005 की ‘योग क्रांति’ पहल के तहत यह काम लगातार चलता रहा है।
संपर्क
श्री रमेश चन्द्र द्विवेदी, सह-संस्थापक, बुन्देलखण्ड विकास सेवा आश्रम।
महर्षि वाग्भट्ट योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान, 2868, शान्ती नगर, मोदी क्लीनिक तिराहा के पास, सरस्वती विद्या मन्दिर इं० कालेज के पास, झांसी रोड, उरई, जनपद जालौन, उत्तर प्रदेश।
बुन्देलखण्ड विकास सेवा आश्रम का सामान्य ईमेल: namaste@bvsaorai.org
झलकियां · मई 2026
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कौन सा सात दिन का क्रम आपके लिए ठीक रहेगा, और प्रवेश की विधि क्या है, यह सब फोन या व्हाट्सऐप पर हम बता देते हैं।